Essay On Environment In Hindi For Class 9

भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में प्रदूषण एक बड़ा पर्यावरणीय मुद्दा है जिसके बारे में हर किसी को पता होना चाहिए. माता-पिता को प्रदुषण के प्रकार, कारण और रोकथाम के बारे में पता होना चाहिए ताकि वो अपने बच्चो को इसके बारे में बता सके. यहाँ निचे हमने प्रदुषण पर निबंध दिया है ( Essay On Pollution In Hindi ) जो आपके बच्चो के लिये सहायक साबित होंगा.

पर्यावरण प्रदुषण विषय पर निबंध / Essay On Pollution In Hindi

आओ दोस्तों कसम ये खाये, प्रदुषण को हम दूर भगाये…

प्रदूषण शब्द का अर्थ होता है चीजो को गन्दा करना. वर्तमान में हम खतरनाक रूप से पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से घिरे हुए हैं. और यह समस्या भविष्य में हमारे लिये जानलेवा भी हो सकती है. इस भयंकर सामाजिक समस्या का मुख्य कारण हैं औद्योगीकरण वनों की कटाई और शहरीकरण प्राकृतिक संसाधन को गन्दा करने वाले उत्पाद जो की सामान्य जीवन की दैनिक जरूरतों के रूप इस्तेमाल की जाती है. रास्तो पर गाडियों का ज्यादा उपयोग होने से पेट्रोल और डीजल का भी ज्यादा से ज्यादा अपव्यय होगा और गाडियों से निकलने वाले धुए से वायु प्रदुषण होता है.

पर्यावरण प्रदुषण / Pollution में सभी हानिकारक प्रदूषक हमारे स्वास्थ पर विपरीत प्रभाव डालते है. प्रदुषण के बहोत से प्रकार होते है जिनमे मुख्य रूप से जल प्रदुषण, वायु प्रदुषण, भू प्रदुषण और ध्वनि प्रदुषण शामिल है. उद्योगों में बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है और इस प्रक्रिया में केमिकल, विषैले पदार्थ और गैस का उपयोग किया जाता है जो मानवी स्वास्थ के लिये हानिकारक होते है. इससे प्रकृति में विभिन्न प्रकार की समस्याये उत्पन्न होती है जैसे की ग्लोबल वार्मिंग / Global Warming, जल प्रदुषण, वायु प्रदुषण / Air Pollutionइत्यादि. पिछले एक दशक में प्राकृतिक प्रदूषक का स्तर बहोत बढ़ा है. सभी प्रकार के प्रदूषण बेशक पूरे पर्यावरण और इकोसिस्टम को प्रभावित कर रहे हैं मतलब जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं. मनुष्य की मूर्ख आदतों से पृथ्वी पर स्वाभाविक रूप से सुंदर वातावरण दिन-ब-दिन बिगड़ता जा रहा है. प्रदूषण सबसे गंभीर मुद्दा बन गया है और हर किसी को अपने दैनिक जीवन में स्वास्थ्य सम्बंधि बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है.

इस पुरे ब्रह्माण्ड में केवल पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जहा जिंदगी के सभी संसाधन उपलब्ध है. इस ग्रह ने हमें जिंदगी दी और हमने इस ग्रह को प्रदूषित किया. इस से तो बेहतर है की हम इस ग्रह को बदलने की कोशिश ही न करे. हम दशको से पृथ्वी को प्रदूषित कर रहे है. हम सभी इसी ग्रह पर रहते है इसीलिये हमारी यह जवाबदारी है की हम इसे स्वस्थ और प्रदुषणरहित रखे. लेकिन हम अपने दैनिक कामो को चलते इतने व्यस्त हो गये की हम हमारी जिम्मेदारियों को ही भूल गये. साफ़ पानी और शुद्ध हवा हमारी स्वस्थ जिंदगी के लिये बहोत जरुरी है. लेकिन आज के आधुनिक युग में इन दो में से एक भी संसाधन साफ़ और शुद्ध नही. अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले सालो में इस ग्रह पर कोई जिंदगी नही रहेगी.

पृथ्वी पर सभी प्राकृतिक गैसो का संतुलन बने रहना बहोत जरुरी है. और ये संतुलन पदों से ही बना रहता है लेकिन हम अपने स्वार्थ के लिये पेड़ो को काट रहे है. जरा सोचिये की यदि इस ग्रह पर पेड़ ही न रहे तो क्या होगा, पेड़ हमारे द्वारा छोड़ी गयी गैस कार्बोन डाइऑक्साइड को ग्रहण करते है और ओक्सिज़न को छोड़ते है. यदि पेड़ इस दुनिया में नही होंगे तो वातावरण में कार्बोन डाइऑक्साइड का प्रमाण बढ़ जायेगा, और इससे ग्लोबल वार्मिंग का खतरा भी बढ़ जायेगा. प्राकृतिक संसाधनों के साथ छेड़-छाड़ करने से प्राकृतिक आपदाये भी आ सकती है. आज के आधुनिक युग में हमने औद्योगिक विकास तो कर ही लिया है लेकिन प्राकृतिक विकास हम नही कर पाये. हम औद्योगिक विकास करने के चक्कर में हमारी प्रकृति को ही भूल गये. और इसी वजह से आज दुनिया में अलग-अलग तरह की बीमारिया उत्पन्न हो रही है. औद्योगीकरण की वजह से जीवन रक्षा प्रणाली तेजी से जीवन विनाशी प्रणाली में परिवर्तित हो रही है.

प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में विचार करें तो ये बड़े गंभीर नजर आते हैं. प्रदूषित वायु में साँस लेने से फेफड़ों और श्वास-संबंधी अनेक रोग उत्पन्न होते हैं. प्रदूषित जल पीने से पेट संबंधी रोग फैलते हैं. गंदा जल, जल में रहने वाले जीवों के लिये भी बहुत हानिकारक होता है. ध्वनि प्रदूषण मानसिक तनाव उत्पन्न करता है. इससे बहरापन, चिंता, अशांति जैसी समस्याओं से गुजरना पड़ता है.

आधुनिक वैज्ञानिक युग में प्रदूषण को पूरी तरह समाप्त करना टेढ़ी खीर हो गई है. अनेक प्रकार के सरकारी और गैर-सरकारी प्रयास अब तक नाकाम सिद्ध हुए हैं. हरेक को ये सोचना चाहिये कि वे आस-पास कूड़े का ढ़ेर व गंदगी इकट्ठा न होने दें. जलाशयों में प्रदूषित जल का शुद्धिकरण होना चाहिये. कोयला तथा पेट्रोलियम पदार्थों का प्रयोग घटाकर सौर-ऊर्जा, सी.एन.जी., पवन-ऊर्जा, बायो गैस, एल.पी.जी., जल-विद्युत जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोतों का अधिकाधिक उपयोग करना चाहिये. इन सभी उपायों को अपनाने से वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण को घटाने में काफी मदद मिलेगी.

ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिये कुछ ठोस एवं सकारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है. रेडियो, टीवी, ध्वनि विस्तारक यंत्रों आदि को कम आवाज में बजाना चाहिये. लाउडस्पीकरों के आम उपयोग को प्रतिबंधित कर देना चाहिये. वाहनों में हल्के आवाज करने वाले ध्वनि-संकेतकों का प्रयोग करना चाहिये. घरेलू उपकरणों को इस तरह प्रयोग में लाना चाहिये जिससे कम से कम ध्वनि उत्पन्न हो.

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि प्रदूषण को कम करने का एकमात्र उपाय सामाजिक जागरूकता है. प्रचार माध्यमों के द्वारा इस संबंध में लोगों तक संदेश पहुँचाने की आवश्यकता है. सामुहिक प्रयास से ही प्रदूषण की विश्वव्यापी समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है. इसे गंभीरता से निपटने की जरूरत है अन्यथा हमारी आने वाली पीढ़ी बहोत ज्यादा भुगतेगी.

आज हम अच्छी चीजो में पैसे खर्च करने की बजाये पर्यावरण को प्रदूषित करने वाली चीजो में पैसे खर्च करने लगे है. प्रदुषण से होने वाली बीमारियों से बचने के लिये हमें प्रदुषण रहित पानी पीना चाहिये, स्वस्थ भोजन करना चाहिये, सुबह की ताज़ी हवा लेनी चाहिये और कभी भी ध्वनि प्रदुषण नही करना चाहिये. हम में से आजकल ज्यादातर लोग फल, हरी सब्जिया खरीदने में पैसे खर्च करने की बजाये दवाइया लेने में पैसे खर्च करने लगे है. हमेशा याद रखे, जबतक हम स्वयं प्रदुषण की रोकथाम के लिये कोई कदम नही उठाते तबतक हम इस समस्या को दूर नही कर सकते.

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Gyani Pandit

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हमारा पर्यावरण दिन-ब-दिन प्रदूषित होता जा रहा है और पर्यावरण को प्रदूषित करने में अभी सबसे बड़ा हाथ मानव का ही है। आधुनिक समय में मानव जीवन में हो रहे बदलाव के कारण मनुष्य अब पर्यावरण को काफी प्रदूषित करने लगा है। अब लोग ज्यादा से ज्यादा बिजली की खपत कर रहे हैं जिसकी वजह से पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती जा रही है। लोग धड़ल्ले से पॉलिथीन और पेट्रोलियम प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते जा रहे हैं जिससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा है। कई सारे पशु पक्षी पॉलिथीन की चपेट में आकर अपनी जान गंवा रहे हैं।

मनुष्य ऐसे कई सारे सामानों का इस्तेमाल कर रहा है जिसको बनाने में कई हानिकारक केमिकल का प्रयोग किया जाता है और जब वह सामान फेका जाता है तो वह खतरनाक केमिकल वातावरण में आ जाता है जिससे वातावरण प्रदूषित हो जाता है। आज अगर आप किसी ट्रेन यात्रा पर जाएं तो आपको पानी की बोतलें बिखरी हुई मिलेंगी, लोग पर्यावरण की चिंता नहीं करते हैं और प्लास्टिक के सामान और बहुत सारे खाने-पीने के सामान इधर उधर फेंक देते हैं जिसका खामियाजा अंततः हम सभी लोगों को उठाना पड़ता है।

पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की अधिक मात्रा से पृथ्वी का तापमान बढ़ता जा रहा है, इसकी वजह से कई सारे देश समुद्र में डूब सकते हैं। मनुष्य पर्यावरण को प्रदूषित सिर्फ अपने आसपास की जगह ही नहीं कर रहे हैं बल्कि अब तो अंतरिक्ष में भी प्रदूषण फैलने लगा है और ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों की चोटियों पर भी प्रदूषण होने लगा है वहां भी लोग जाते हैं तो प्रदूषण फैला कर आते हैं। पर्यावरण की समस्या धीरे-धीरे गंभीर होती जा रही है और वह समय दूर नहीं होगा जब मनुष्यों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा। अगर पर्यावरण यूं ही प्रदूषित होती रहेगी तो पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने से लोगों में बीमारियां बढ़ती जाएगी और इसका बच्चों में खासा असर देखा जा रहा है। अगर प्रदूषण की रफ्तार यूं ही जारी रही तो हमारे खाने-पीने का सामान भी पूरी तरह प्रदूषित हो जाएगा और फिर लोगों को स्वच्छ खाना भी मिलना मुश्किल हो जाएगा।

मनुष्य प्रजाति ज्यादा से ज्यादा दिन पृथ्वी पर टिके रहे इसके लिए यह जरूरी है कि हमारा पर्यावरण प्रदूषित नहीं हो। हमलोगों को अपने पर्यावरण को स्वच्छ रखने का भरपूर प्रयास करना चाहिए और किसी को भी प्रदूषण फैलाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। लोगों को प्रदूषण नहीं फैलाना चाहिए और अगर वह किसी और को प्रदूषण फैलाते हुए देखे तो उन्हें रोकना और समझाना चाहिए। पर्यावरण को अच्छा बनाने के लिए लोगों को स्वच्छता अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए।

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